पहला चरण: 50 ऑब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर
- अर्धनारीश्वर पाठ के लेखक है?
Ans: रामधारी सिंह दिनकर - रामधारी सिंह दिनकर का जन्म हुआ था?
Ans: 23 सितम्बर, 1908 - रामधारी सिंह दिनकर का निधन हुआ था?
Ans: 24 अप्रैल, 1974 - दिनकर जी का जन्म स्थान है?
Ans: सिमरिया, बेगूसराय बिहार - दिनकर जी को किस नाम से सम्मानित किया गया था?
Ans: राष्ट्रकवि - दिनकर जी को किस रचना पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?
Ans: संस्कृत के चार अध्याय - उर्वशी रचनाकार है?
Ans: रामधारी सिंह दिनकर - दिनकर जी को उनकी रचना “ उर्वशी” के लिए किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था?
Ans: भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार - दिनकर जी किस युग के कवि थे?
Ans: छायावादोत्तर युग - दिनकर जी ने कविता लिखने की शुरुआत कब से की?
Ans: तीस के दशक में - दिनकर जी पर वैभववर्धक प्रभाव किसका है?
Ans: जातीय महाकाव्य महाभारत और व्यास की कवित्व – प्रतिभा - अर्धनारीश्वर भारत का …….. प्रतीक है।
Ans: मिथकीय - अर्धनारीश्वर पाठ मे किसका कल्पित रूप है?
Ans: शिव और पार्वती - अर्धनारीश्वर का आधा अंग ……… और आधा अंग ……… का होता हैं।
Ans: पुरुष और नारी - नर-नारी पूर्ण रूप से क्या है?
Ans: समान - पुरुष में महिलाओ के गुण आने पर किसकी हानि नहीं होती है?
Ans: मर्यादा - संसार में सर्वत्र कौन-कौन है?
Ans: पुरुष – पुरुष और स्त्री – स्त्री - नारी समझती है कि— पुरुष के गुण सीखने से उसके नारीत्व में …… लगेगा।
Ans: बट्टा - पुरुष स्त्रीयोचित गुण को अपनाकर समाज में .……. कहलाने से घबराता है।
Ans: स्त्रैण - ……… पुरुष और ……. नारी रही है।
Ans: धूप, चाॅंदनी - ……. पति और …… पत्नी रही है।
Ans: विचार, भावना - तंतु से वस्त्र बुनकर कौन तैयार करता है?
Ans: नर - मिट्टी तोड़कर अन्न उपजाने का कार्य कौन कर सकता है?
Ans: नर - राजा और रानी किसके प्रतीक होते हैं?
Ans: काया, छाया - दिवस की ज्वाला और तप्त धूप, ये किसके द्वारा लाई गई चीजें हैं।
Ans: पुरुष - कौन अपने साथ यामिनी की शांति लाती है?
Ans: कामिनी - नारी की पराधीनता कब आरंभ हुई?
Ans: कृषि के आविष्कार पर - कृषि आविष्कार के बाद जिंदगी कितने टुकड़ों में बँट गई है?
Ans: दो - किसने अपने मादाओं पर आर्थिक परवशता नहीं लादी है?
Ans: पशुओं और पक्षियों ने - सभ्यता का पहला सोपान किसे मानते है?
Ans: कृषि - पत्नी अपने पति को किस दृष्टि से देखती है?
Ans: लता अपने वृक्ष को जैसे - पराधीनता के कारण नारी अपने …….. की अधिकारिणी नहीं रही।
Ans: अस्तित्व - नारी के प्रतिष्ठा, सुख तथा जीवन किसके मर्जी पर टिकने लगे?
Ans: पुरुष - नारी की पद-मर्यादा किसके प्रचार से उठती है?
Ans: प्रवृत्तिमार्ग - नारी को गले से किसने लगाया?
Ans: प्रवृत्तिमार्गी - नारी क्या है?
Ans: आनंद की खान - मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी साधना किसे मानी जाने लगी?
Ans: वैयक्तिक मुक्ति को - नारियों को भिक्षुणी होने का अधिकार किसने दिया था?
Ans: बुध और महावीर - बुध द्वारा चलाया गया धर्म कितने वर्ष तक चलने वाला था?
Ans: पाँच सहस्त्र वर्ष - नारियों से कौन भय खाते थे?
Ans: धर्म साधक महात्मा और साधु - जीवन के साथ नारी को भी अलग किसने धकेल दिया ?
Ans: निवृत्तिमार्गी ने - “नारी तो हम हूँ करी, तब ना किया विचार। जब जानी तब परिहरी, नारी महा विकार ।।” यह दोहा किसके द्वारा रचित है? Ans: कबीर
- नारी को “अहेरिन, नागिन और जादूगरनी” किसने कहा है?
Ans: बर्नार्ड - नाग और जादूगर के गुण किसमें अधिक होते हैं ?
Ans: पुरुष - यह कहना किसका है कि— पुरुष जब नारी के गुण लेता है तब वह देवता बन जाता हैं, किंतु नारी जब नर के गुण सिखती है तब वह राक्षसी हो जाती है?
Ans: प्रेमचंद - नारी और नर किसकी दो प्रतिमाएँ हैं?
Ans: एक ही द्रव्य की ढली - कौरवों की सभा में संधि की वार्ता किसके बीच हुई थी?
Ans: कृष्ण और दुर्योधन - नारी इतनी कोमल हो गई है कि उसे …….. कहना चाहिए। Ans: दुर्बल
- गाँधीजी ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में …….. की भी साधना की थी।
Ans: नारीत्व - “बापू, मेरी माँ” पुस्तक किसने लिखी है?
Ans: गाँधीजी की पोती ने

दूसरा चरण : 10 Short Type Question Answer
- अर्धनारीश्वर’ निबंध के रचनाकार कौन हैं?
Ans: ‘अर्धनारीश्वर’ निबंध के रचनाकार रामधारी सिंह दिनकर हैं। वे राष्ट्रकवि के रूप में प्रसिद्ध हैं। - रामधारी सिंह दिनकर का जन्म कब और कहाँ हुआ?
Ans: रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गाँव में हुआ था। - दिनकर को किस उपाधि से सम्मानित किया गया था?
Ans: दिनकर को ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उनकी रचनाएँ राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत हैं। - ‘अर्धनारीश्वर’ शीर्षक का क्या मतलब है?
Ans: ‘अर्धनारीश्वर’ शिव और पार्वती का मिथकीय रूप है, जो नर और नारी के सम्मानता का प्रतीक है। - दिनकर को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस रचना के लिए दिया गया था?
Ans: दिनकर को ‘संस्कृति के चार अध्याय’ रचना के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था। - दिनकर की रचना ‘उर्वशी’ के लिए कौन सा पुरस्कार मिला?
Ans: ‘उर्वशी’ के लिए दिनकर को भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। - नारी की पराधीनता कब शुरू हुई?
Ans: नारी की पराधीनता कृषि के आविष्कार के बाद शुरू हुई, जब समाज में श्रम विभाजन हुआ। - लेखक ने कौरव सभा का उल्लेख क्यों किया?
Ans: लेखक ने कौरव सभा का उल्लेख यह बताने के लिए किया कि यदि संधि की वार्ता कुंती और गांधारी के बीच होती, तो महाभारत युद्ध टल सकता था। - प्रेमचंद के अनुसार पुरुष में नारी गुण का क्या प्रभाव है?
Ans: प्रेमचंद के अनुसार, पुरुष में नारी गुण आने पर वह देवता बन जाता है, जबकि नारी में पुरुष गुण आने पर वह राक्षसी बन सकती है। - नारी को लेखक ने आनंद की खान क्यों कहा?
Ans: लेखक ने नारी को आनंद की खान कहा क्योंकि नारी में दया, प्रेम और कोमलता जैसे गुण होते हैं, जो जीवन को सुखमय बनाते हैं।

तीसरा चरण : 10 Long Type Question / Answers
- ‘अर्धनारीश्वर’ निबंध में दिनकर ने नर और नारी के समन्वय पर क्या विचार स्पष्ट किए हैं?
Ans: दिनकर ने ‘अर्धनारीश्वर’ में नर और नारी के समन्वय को भारतीय मिथक के आधार पर समझाया है। वे कहते हैं कि नर और नारी एक ही द्रव्य की दो प्रतिमाएँ होती हैं, जिनमें कोई भेद नहीं होता है। नारी में पुरुष के गुण और पुरुष में नारी के गुण होने से दोनों पूर्ण होते हैं। लेखक ने इस समन्वय को शिव-पार्वती के अर्धनारीश्वर रूप से जोड़ा, जो समानता और संतुलन का प्रतीक है। समाज में दोनों के गुणों का आदान-प्रदान जीवन को समृद्ध बनाता है। - दिनकर के अनुसार नारी की पराधीनता का क्या कारण है?
Ans: दिनकर के अनुसार, नारी की पराधीनता का कारण है कृषि के आविष्कार के बाद समाज में श्रम विभाजन है। पुरुष ने बाहरी कार्य और शक्ति का क्षेत्र संभाला, जबकि नारी घरेलू कार्यों तक सीमित रह गयी। इससे नारी आर्थिक और सामाजिक रूप से पुरुष पर निर्भर हो गई। उसकी प्रतिष्ठा और स्वतंत्रता पुरुष की मर्जी पर टिकने लगी। लेखक इसे सभ्यता का बहुत दुखद परिणाम मानते हैं। - लेखक ने कौरव सभा के संदर्भ में क्या तर्क दिया ?
Ans: लेखक ने कौरव सभा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि संधि की वार्ता कृष्ण और दुर्योधन के बजाय कुंती और गांधारी के बीच हुई होती, तो महाभारत युद्ध पहले ही टल सकता था। नारी के गुण जैसे दया, सहिष्णुता और विनम्रता के कारण दोनों माताएँ युद्ध को रोकने का प्रयास करतीं। दिनकर यहाँ नारी की शांतिप्रिय और समझौतावादी प्रकृति को रेखांकित करते हैं। यह तर्क नारी की सामाजिक भूमिका को महत्व देता है। - दिनकर ने नारी को ‘आनंद की खान’ क्यों कहा है?
Ans: दिनकर ने नारी को ‘आनंद की खान’ इसलिए कहा क्योंकि नारी में प्रेम, दया, कोमलता और करुणा जैसे गुण प्राकृतिक रूप से विद्यमान हैं। ये गुण जीवन को सुखमय और सुंदर बनाते हैं। नारी की यह विशेषता पुरुष के कठोर स्वभाव को संतुलित करती है। लेखक का मानना है कि नारी का यह आनंदमय स्वरूप समाज को सामंजस्य और शांति प्रदान करता है। - प्रेमचंद के कथन को लेखक ने कैसे उद्धृत किया और उसका क्या अर्थ है?
Ans: दिनकर ने प्रेमचंद के कथन को उद्धृत किया कि पुरुष जब नारी के गुण अपनाता है, तो वह देवता जैसा बन जाता है, लेकिन जब नारी , पुरुष के गुण सीखती है, तो वह राक्षसी हो जाती है। इस कथन का अर्थ है कि समाज में नारी से कोमलता और पुरुष से शक्ति की अपेक्षा की जाती है। लेखक इस कथन का उपयोग नर और नारी के गुणों के सामाजिक धारणाओं को दर्शाने के लिए करते हैं। - दिनकर ने निवृत्तिमार्ग और प्रवृत्तिमार्ग का उल्लेख क्यों किया?
Ans: दिनकर ने निवृत्तिमार्ग और प्रवृत्तिमार्ग का उल्लेख नारी के सामाजिक स्थान को समझाने के लिए किया। प्रवृत्तिमार्ग में नारी को सम्मान और आनंद की खान माना गया, जबकि निवृत्तिमार्ग में उसे जीवन से अलग कर दिया गया। निवृत्तिमार्गी साधकों ने नारी को विकार माना, जिससे उसकी सामाजिक स्थिति गिर गई। दिनकर इन दोनों दृष्टिकोणों के बीच संतुलन की आवश्यकता पर जोर देते हैं। - कृषि के आविष्कार ने नारी की स्थिति को कैसे प्रभावित किया?
Ans: कृषि के आविष्कार ने समाज में श्रम विभाजन को जन्म दिया, जिससे पुरुष ने बाहरी कार्य और नारी ने घरेलू कार्य संभाले। इससे नारी आर्थिक रूप से पुरुष पर निर्भर हो गई और उसकी स्वतंत्रता सीमित हुई। दिनकर के अनुसार, यह पराधीनता नारी की सामाजिक मर्यादा और प्रतिष्ठा को कम करने का कारण बनी। इस बदलाव ने नारी को पुरुष की मर्जी पर आश्रित कर दिया। - दिनकर ने गांधीजी के नारीत्व की साधना का उल्लेख कैसे किया?
Ans: दिनकर ने बताया कि गांधीजी ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में नारीत्व की साधना की, जिसमें उन्होंने नारी के गुणों जैसे दया, करुणा और अहिंसा को अपनाया। गांधीजी का मानना था कि ये गुण मानवता को पूर्णता प्रदान करते हैं। लेखक इस साधना को नर और नारी के समन्वय का प्रतीक मानते हैं। यह दर्शाता है कि गांधीजी नारी के गुणों को सामाजिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण मानते थे। - ‘नारी और नर एक ही द्रव्य की दो प्रतिमाएँ हैं।’ इस कथन का क्या तात्पर्य है?
Ans: दिनकर का यह कथन दर्शाता है कि नर और नारी में मूलभूत अंतर नहीं है; दोनों एक ही मानवता के दो रूप हैं। उनके गुण एक-दूसरे के पूरक हैं। नर में नारी के गुण और नारी में नर के गुण होने से दोनों पूर्णता प्राप्त करते हैं। यह विचार अर्धनारीश्वर की मिथकीय अवधारणा पर आधारित है, जो समानता और संतुलन को दर्शाता है। - ‘अर्धनारीश्वर’ निबंध का मूल संदेश क्या है?
Ans: ‘अर्धनारीश्वर’ निबंध का मूल संदेश नर और नारी की समानता और उनके गुणों का समन्वय है। दिनकर कहते हैं कि नर और नारी एक ही द्रव्य की दो प्रतिमाएँ हैं, जिनके गुण एक-दूसरे को पूर्ण करते हैं। समाज में दोनों के बीच संतुलन और सम्मान आवश्यक है। नारी की पराधीनता को समाप्त कर उसे स्वतंत्र और सम्मानित स्थान देना चाहिए। यह निबंध लैंगिक समानता और सामाजिक सामंजस्य पर बल देता है।