पहला चरण: 50 Objectives & Answers
- AC का पूरा नाम क्या होता है?
उत्तर – Alternative Current - भारत में प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति कितनी होती है?
उत्तर – 50 हर्ट्ज (Hz)। - प्रत्यावर्ती धारा का आवर्तकाल कितना होता है?
उत्तर – T=1fT = \frac{1}{f}T=f1 - प्रत्यावर्ती धारा का औसत मान कितना होता है?
उत्तर – शून्य (0) - प्रत्यावर्ती धारा का प्रभावी मान क्या होता है?
उत्तर – Irms=I02I_{rms} = \frac{I_0}{\sqrt{2}}Irms=2I0 - प्रत्यावर्ती वोल्टेज का प्रभावी मान क्या होता है?
उत्तर – Vrms=V02V_{rms} = \frac{V_0}{\sqrt{2}}Vrms=2V0 - शक्ति गुणांक (Power Factor) क्या कहलाता है?
उत्तर – वोल्टेज और धारा के बीच कोण का कोसाइन, cosϕ\cos \phicosϕ, शक्ति गुणांक कहलाता है। - शुद्ध प्रतिरोधी परिपथ में वोल्टेज और धारा का संबंध क्या होता है?
उत्तर – दोनों समान फेज में रहते हैं। - प्रेरक परिपथ में धारा वोल्टेज से कितने कोण से पीछे रहती है?
उत्तर – 90° से। - धारिता परिपथ में धारा वोल्टेज से कितने कोण से आगे रहती है?
उत्तर – 90° से। - प्रेरक रिएक्टेंस का सूत्र क्या है?
उत्तर – XL=2πfLX_L = 2\pi fLXL=2πfL - धारिता रिएक्टेंस का सूत्र क्या है?
उत्तर – XC=12πfCX_C = \frac{1}{2\pi fC}XC=2πfC1 - जब XL=XCX_L = X_CXL=XC हो तो क्या होता है?
उत्तर – परिपथ में अनुनाद (Resonance) होता है। - अनुनाद की अवस्था में धारा कैसी होती है?
उत्तर – अधिकतम (Maximum) होती है। - अनुनाद की अवस्था में प्रतिबाधा कैसी होती है?
उत्तर – न्यूनतम (Minimum) होती है। - RLC परिपथ की प्रतिबाधा क्या होती है?
उत्तर – Z=R2+(XL−XC)2Z = \sqrt{R^2 + (X_L – X_C)^2}Z=R2+(XL−XC)2 - शुद्ध प्रेरक परिपथ में शक्ति क्या होती है?
उत्तर – शून्य (0) - शुद्ध धारिता परिपथ में शक्ति क्या होती है?
उत्तर – शून्य (0) - RLC परिपथ में शक्ति का औसत मान क्या होता है?
उत्तर – P=VrmsIrmscosϕP = V_{rms} I_{rms} \cos \phiP=VrmsIrmscosϕ - प्रेरक कुंडली में ऊर्जा किस रूप में संचित होती है?
उत्तर – चुंबकीय ऊर्जा के रूप में। - संधारित्र में ऊर्जा किस रूप में संचित होती है?
उत्तर – विद्युत ऊर्जा के रूप में। - शक्ति की इकाई क्या है?
उत्तर – वाट (Watt) - 1 किलोवाट = कितने वाट के बराबर है?
उत्तर – 1000 वाट - 1 हर्ट्ज का अर्थ क्या है?
उत्तर – प्रति सेकंड एक चक्र (1 cycle per second) - AC वोल्टमीटर क्या मापता है?
उत्तर – वोल्टेज का प्रभावी मान। - AC एमीटर क्या मापता है?
उत्तर – धारा का प्रभावी मान। - DC शक्ति का सूत्र क्या है?
उत्तर – P=VIP = VIP=VI - AC शक्ति का सूत्र क्या है?
उत्तर – P=VIcosϕP = VI \cos \phiP=VIcosϕ - शुद्ध प्रतिरोधी परिपथ में शक्ति गुणांक कितना होता है?
उत्तर – 1 - शुद्ध प्रेरक परिपथ में शक्ति गुणांक कितना होता है?
उत्तर – 0 - शुद्ध धारिता परिपथ में शक्ति गुणांक कितना होता है?
उत्तर – 0 - प्रत्यावर्ती धारा का क्षणिक मान क्या होता है?
उत्तर – i=I0sinωti = I_0 \sin \omega ti=I0sinωt - प्रत्यावर्ती वोल्टेज का क्षणिक मान क्या होता है?
उत्तर – v=V0sinωtv = V_0 \sin \omega tv=V0sinωt - कोणीय आवृत्ति का सूत्र क्या है?
उत्तर – ω=2πf\omega = 2\pi fω=2πf - फेज अंतर किसे कहते हैं?
उत्तर – दो तरंगों के समय या कोण में अंतर को फेज अंतर कहते हैं। - प्रेरक रिएक्टेंस किस पर निर्भर करता है?
उत्तर – आवृत्ति (f) और प्रेरकत्व (L) पर। - धारिता रिएक्टेंस किस पर निर्भर करता है?
उत्तर – आवृत्ति (f) और धारिता (C) पर। - यदि आवृत्ति बढ़ाई जाए तो XLX_LXL पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर – XLX_LXL बढ़ेगा। - यदि आवृत्ति बढ़ाई जाए तो XCX_CXC पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर – XCX_CXC घटेगा। - प्रतिबाधा (Impedance) की इकाई क्या है?
उत्तर – ओम (Ω) - RLC परिपथ में फेज कोण का सूत्र क्या है?
उत्तर – tanϕ=XL−XCR\tan \phi = \frac{X_L – X_C}{R}tanϕ=RXL−XC - RLC श्रेणी परिपथ को और क्या कहते हैं?
उत्तर – सीरीज रेजोनेंस परिपथ। - प्रेरकत्व (Inductance) की इकाई क्या है?
उत्तर – हेनरी (Henry) - धारिता (Capacitance) की इकाई क्या है?
उत्तर – फैराड (Farad) - यदि XL>XCX_L > X_CXL>XC, तो परिपथ किस प्रकार का होगा?
उत्तर – प्रेरक (Inductive) - यदि XL<XCX_L < X_CXL<XC, तो परिपथ किस प्रकार का होगा?
उत्तर – धारित (Capacitive) - अनुनाद पर ϕ\phiϕ का मान क्या होगा?
उत्तर – शून्य (0) - RMS मान किसे कहते हैं?
उत्तर – वह स्थिर धारा का मान जो समान शक्ति उत्पन्न करे। - RMS का पूरा रूप क्या है?
उत्तर – Root Mean Square - प्रत्यावर्ती धारा को उत्पन्न करने वाला यंत्र कौन-सा है?
उत्तर – AC जनरेटर (Alternator)
दूसरा चरण : 15 Short Answer Questions
- प्रत्यावर्ती धारा क्या होती है?
उत्तर – वह धारा जो समय के साथ अपनी दिशा और परिमाण को निरंतर बदलती रहती है, उसे प्रत्यावर्ती धारा (AC) कहते हैं। - प्रत्यावर्ती धारा का गणितीय समीकरण क्या है?
उत्तर – i=I0sinωti = I_0 \sin \omega ti=I0sinωt
जहाँ I0I_0I0 अधिकतम धारा तथा ω=2πf\omega = 2\pi fω=2πf कोणीय आवृत्ति है। - प्रभावी (RMS) मान क्या होता है?
उत्तर – वह स्थिर धारा का मान जो समान शक्ति उत्पन्न करे, प्रभावी मान कहलाता है।
Irms=I02I_{rms} = \frac{I_0}{\sqrt{2}}Irms=2I0 - प्रेरक रिएक्टेंस क्या है?
उत्तर – प्रेरक कुंडली द्वारा प्रत्यावर्ती धारा के प्रवाह का विरोध प्रेरक रिएक्टेंस कहलाता है।
XL=2πfLX_L = 2\pi fLXL=2πfL - धारिता रिएक्टेंस क्या है?
उत्तर – संधारित्र द्वारा प्रत्यावर्ती धारा के प्रवाह का विरोध धारिता रिएक्टेंस कहलाता है।
XC=12πfCX_C = \frac{1}{2\pi fC}XC=2πfC1 - शक्ति गुणांक (Power Factor) क्या है?
उत्तर – यह वोल्टेज और धारा के बीच कोण का कोसाइन होता है।
cosϕ=RZ\cos \phi = \frac{R}{Z}cosϕ=ZR - अनुनाद क्या है?
उत्तर – जब किसी RLC परिपथ में XL=XCX_L = X_CXL=XC हो जाए, तो परिपथ अनुनाद की अवस्था में कहा जाता है। - अनुनाद पर धारा कैसी होती है?
उत्तर – अनुनाद की अवस्था में धारा अधिकतम होती है क्योंकि प्रतिबाधा न्यूनतम होती है। - RLC परिपथ में प्रतिबाधा क्या होती है?
उत्तर – Z=R2+(XL−XC)2Z = \sqrt{R^2 + (X_L – X_C)^2}Z=R2+(XL−XC)2 - प्रेरक कुंडली में ऊर्जा किस रूप में संचित होती है?
उत्तर – चुंबकीय ऊर्जा के रूप में।
U=12LI2U = \frac{1}{2} L I^2U=21LI2 - संधारित्र में ऊर्जा किस रूप में संचित होती है?
उत्तर – विद्युत ऊर्जा के रूप में।
U=12CV2U = \frac{1}{2} C V^2U=21CV2 - शुद्ध प्रेरक परिपथ में शक्ति क्या होती है?
उत्तर – शून्य, क्योंकि वोल्टेज और धारा में 90° का अंतर होता है। - शुद्ध प्रतिरोधी परिपथ में वोल्टेज और धारा का फेज संबंध क्या होता है?
उत्तर – दोनों समान फेज में रहते हैं। - प्रत्यावर्ती धारा की शक्ति का औसत मान क्या है?
उत्तर – P=VIcosϕP = V I \cos \phiP=VIcosϕ - RMS का पूरा रूप क्या है?
उत्तर – Root Mean Square।
तीसरा चरण: 15 Long Answer Questions
- प्रत्यावर्ती धारा (AC) और दिष्ट धारा (DC) में क्या अंतर है?
उत्तर –
दिष्ट धारा में धारा की दिशा स्थिर रहती है जबकि प्रत्यावर्ती धारा में यह बदलती रहती है।
AC का उत्पादन जनरेटर से होता है जबकि DC का बैटरी से।
AC का औसत मान शून्य होता है जबकि DC का निश्चित।
AC लंबी दूरी तक आसानी से भेजी जा सकती है। - प्रत्यावर्ती धारा का प्रभावी मान कैसे प्राप्त होता है?
उत्तर –
प्रत्यावर्ती धारा का RMS मान वह स्थिर धारा है जो समान शक्ति उत्पन्न करे।
Irms=I02I_{rms} = \frac{I_0}{\sqrt{2}}Irms=2I0
इसी प्रकार Vrms=V02V_{rms} = \frac{V_0}{\sqrt{2}}Vrms=2V0
यह मान AC की व्यावहारिक शक्ति मापने में प्रयुक्त होता है। - प्रेरक रिएक्टेंस का व्यंजक सिद्ध कीजिए।
उत्तर –
यदि किसी प्रेरक कुंडली पर AC वोल्टेज लगाया जाए,
तो V=LdidtV = L \frac{di}{dt}V=Ldtdi
अधिकतम मान लगाने पर XL=V0I0=ωL=2πfLX_L = \frac{V_0}{I_0} = \omega L = 2\pi fLXL=I0V0=ωL=2πfL
इसे प्रेरक रिएक्टेंस कहते हैं। - धारिता रिएक्टेंस का व्यंजक सिद्ध कीजिए।
उत्तर –
यदि संधारित्र पर AC लगाया जाए तो
i=Cdvdti = C \frac{dv}{dt}i=Cdtdv
अधिकतम मानों के अनुपात से
XC=V0I0=1ωC=12πfCX_C = \frac{V_0}{I_0} = \frac{1}{\omega C} = \frac{1}{2\pi fC}XC=I0V0=ωC1=2πfC1
इसे धारिता रिएक्टेंस कहते हैं। - RLC श्रेणी परिपथ की प्रतिबाधा का सूत्र सिद्ध कीजिए।
उत्तर –
R, L और C श्रेणी में जुड़े हों तो कुल वोल्टेज
V=(VR)2+(VL−VC)2V = \sqrt{(V_R)^2 + (V_L – V_C)^2}V=(VR)2+(VL−VC)2
अतः प्रतिबाधा Z=VI=R2+(XL−XC)2Z = \frac{V}{I} = \sqrt{R^2 + (X_L – X_C)^2}Z=IV=R2+(XL−XC)2 - शक्ति गुणांक का महत्व समझाइए।
उत्तर –
शक्ति गुणांक cosϕ\cos \phicosϕ दर्शाता है कि धारा और वोल्टेज में कितना फेज अंतर है।
यदि cosϕ=1\cos \phi = 1cosϕ=1, तो परिपथ अधिकतम शक्ति प्रदान करता है।
कम शक्ति गुणांक होने पर विद्युत शक्ति का उपयोग घट जाता है। - अनुनाद (Resonance) क्या है और इसका महत्व बताइए।
उत्तर –
जब किसी RLC परिपथ में XL=XCX_L = X_CXL=XC हो जाए तो अनुनाद होता है।
इस समय प्रतिबाधा न्यूनतम तथा धारा अधिकतम होती है।
यह स्थिति ट्यूनिंग सर्किट और रेडियो रिसीवरों में उपयोगी होती है। - शुद्ध प्रतिरोधी परिपथ में धारा और वोल्टेज का फेज संबंध समझाइए।
उत्तर –
शुद्ध प्रतिरोधक परिपथ में धारा और वोल्टेज समान फेज में होते हैं।
इसका अर्थ है कि दोनों एक साथ अधिकतम और न्यूनतम मान प्राप्त करते हैं।
शक्ति = VIcos0=VIVI \cos 0 = VIVIcos0=VI। - प्रेरक परिपथ में शक्ति शून्य क्यों होती है?
उत्तर –
क्योंकि प्रेरक परिपथ में वोल्टेज धारा से 90° आगे होता है।
P=VIcos90°=0P = VI \cos 90° = 0P=VIcos90°=0।
इसलिए औसत शक्ति शून्य होती है, ऊर्जा केवल चुंबकीय क्षेत्र में संचित होती है। - धारिता परिपथ में शक्ति शून्य क्यों होती है?
उत्तर –
धारिता परिपथ में धारा वोल्टेज से 90° आगे रहती है।
इसलिए P=VIcos90°=0P = VI \cos 90° = 0P=VIcos90°=0।
ऊर्जा संधारित्र में विद्युत क्षेत्र के रूप में संचित होती है। - प्रत्यावर्ती धारा की शक्ति का व्यंजक सिद्ध कीजिए।
उत्तर –
क्षणिक शक्ति p=vi=V0I0sin2ωtcosϕp = vi = V_0 I_0 \sin^2 \omega t \cos \phip=vi=V0I0sin2ωtcosϕ।
औसत लेने पर P=VrmsIrmscosϕP = V_{rms} I_{rms} \cos \phiP=VrmsIrmscosϕ।
यह शक्ति केवल तब अधिकतम होती है जब cosϕ=1\cos \phi = 1cosϕ=1। - प्रेरक कुंडली में ऊर्जा का व्यंजक सिद्ध कीजिए।
उत्तर –
प्रेरक कुंडली में ऊर्जा चुंबकीय क्षेत्र में संचित होती है।
कार्य W=∫0ILi di=12LI2W = \int_0^I L i\,di = \frac{1}{2} L I^2W=∫0ILidi=21LI2।
यह चुंबकीय ऊर्जा के रूप में संग्रहित रहती है। - संधारित्र में संचित ऊर्जा का व्यंजक लिखिए।
उत्तर –
संधारित्र की ऊर्जा U=12CV2U = \frac{1}{2} C V^2U=21CV2।
यह ऊर्जा प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र में संचित रहती है।
जब वोल्टेज घटता है, यह ऊर्जा परिपथ को लौटाई जाती है। - प्रत्यावर्ती धारा को उत्पन्न करने वाला यंत्र कौन है? इसके सिद्धांत बताइए।
उत्तर –
प्रत्यावर्ती धारा AC जनरेटर से उत्पन्न होती है।
यह विद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
जब चालक कुंडली चुम्बकीय क्षेत्र में घूमती है,
तो उसमें प्रेरित धारा उत्पन्न होती है जिसकी दिशा समय के साथ बदलती है। - शक्ति का औसत मान निकालिए।
उत्तर –
क्षणिक शक्ति p=V0I0sinωtsin(ωt−ϕ)p = V_0 I_0 \sin \omega t \sin(\omega t – \phi)p=V0I0sinωtsin(ωt−ϕ)
औसत मान P=VrmsIrmscosϕP = V_{rms} I_{rms} \cos \phiP=VrmsIrmscosϕ।
यह वही शक्ति है जो परिपथ में वास्तविक कार्य करती हबिंद
चौथा चरण: 30 Important Points
- प्रत्यावर्ती धारा दिशा और परिमाण दोनों बदलती है।
- भारत में AC की आवृत्ति 50 Hz है।
- ω=2πf\omega = 2\pi fω=2πf कोणीय आवृत्ति है।
- AC का औसत मान = 0।
- RMS मान = I02\frac{I_0}{\sqrt{2}}2I0।
- AC की अधिकतम धारा = I0I_0I0।
- प्रेरक रिएक्टेंस XL=2πfLX_L = 2\pi fLXL=2πfL।
- धारिता रिएक्टेंस XC=12πfCX_C = \frac{1}{2\pi fC}XC=2πfC1।
- प्रतिबाधा Z=R2+(XL−XC)2Z = \sqrt{R^2 + (X_L – X_C)^2}Z=R2+(XL−XC)2।
- अनुनाद पर XL=XCX_L = X_CXL=XC।
- अनुनाद पर धारा अधिकतम होती है।
- अनुनाद पर प्रतिबाधा न्यूनतम होती है।
- प्रेरक परिपथ में शक्ति शून्य होती है।
- धारिता परिपथ में शक्ति शून्य होती है।
- प्रतिरोधी परिपथ में शक्ति अधिकतम होती है।
- शक्ति गुणांक = cosϕ\cos \phicosϕ।
- cosϕ=1\cos \phi = 1cosϕ=1 → शुद्ध प्रतिरोधी।
- cosϕ=0\cos \phi = 0cosϕ=0 → शुद्ध प्रेरक या धारिता परिपथ।
- AC जनरेटर विद्युतचुंबकीय प्रेरण पर कार्य करता है।
- RLC परिपथ में फेज कोण tanϕ=XL−XCR\tan \phi = \frac{X_L – X_C}{R}tanϕ=RXL−XC।
- प्रेरकत्व की इकाई हेनरी (H)।
- धारिता की इकाई फैराड (F)।
- प्रतिबाधा की इकाई ओम (Ω)।
- शक्ति की इकाई वाट (W)।
- 1 किलोवाट = 1000 वाट।
- प्रत्यावर्ती धारा को मापने के लिए AC एमीटर उपयोग होता है।
- AC वोल्टेज मापने के लिए AC वोल्टमीटर।
- प्रेरक में ऊर्जा चुंबकीय रूप में संचित होती है।
- संधारित्र में ऊर्जा विद्युत रूप में संचित होती है।
- बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से अनुनाद, RLC परिपथ और शक्ति पर प्रश्न निश्चित आते हैं।