पहला चरण: 50 Objectives With Answers
प्रश्न 1 : उपसहसंयोजक यौगिक की परिभाषा क्या है?
उत्तर: वह यौगिक जिसमें केन्द्रीय धातु परमाणु या आयन लिगेण्डों से घिरा होता है तथा जटिल आयन बनाता है।
प्रश्न 2 : लिगेण्ड क्या होता है?
उत्तर: इलेक्ट्रॉन युग्म दाता प्रजाति जो धातु से सहसंयोजक बंध बनाती है।
प्रश्न 3 : [Co(NH₃)₆]Cl₃ में ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
उत्तर: +3
प्रश्न 4 : उपसहसंयोजक संख्या किसे कहते हैं?
उत्तर: केन्द्रीय धातु से जुड़े लिगेण्डों की संख्या।
प्रश्न 5 : EDTA एक क्या प्रकार का लिगेण्ड है?
उत्तर: षट्दंतुरी (hexadentate)।
प्रश्न 6 : Werner सिद्धांत के अनुसार प्राथमिक संयोजकता क्या है?
उत्तर: आयनिक बंध से संतुष्ट संयोजकता।
प्रश्न 7 : द्वितीयक संयोजकता किसे कहते हैं?
उत्तर: सहसंयोजक बंध से संतुष्ट उपसहसंयोजकता।
प्रश्न 8 : [Co(NH₃)₅Cl]Cl₂ में Cl आयनों की संख्या जो AgNO₃ से अवक्षेपित होते हैं?
उत्तर: 2
प्रश्न 9 : ज्यामितीय समावयवता किसमें प्रदर्शित होती है?
उत्तर: वर्ग समतलीय (square planar) एवं अष्टफलकीय (octahedral) यौगिकों में।
प्रश्न 10 : [Ma₄b₂] प्रकार के यौगिक में कितने ज्यामितीय समावयव होते हैं?
उत्तर: 2 (cis एवं trans)
प्रश्न 11 : प्रकाशिक समावयवता किसमें होती है?
उत्तर: अष्टफलकीय यौगिकों में जहां तीन द्विदंतुर लिगेण्ड होते हैं।
प्रश्न 12 : [Co(en)₃]Cl₃ में कितने प्रकाशिक समावयव होते हैं?
उत्तर: 2 (d एवं l)
प्रश्न 13 : संयोजन समावयवता किसमें होती है?
उत्तर: जब लिगेण्ड एवं प्रतिसंयोजक दोनों विनिमय योग्य हों।
प्रश्न 14 : Valence Bond Theory के अनुसार [CoF₆]³⁻ की ज्यामिति क्या है?
उत्तर: अष्टफलकीय (sp³d² संकरित)
प्रश्न 15 : [Ni(CN)₄]²⁻ में Ni की संकरिता क्या है?
उत्तर: dsp² (वर्ग समतलीय)
प्रश्न 16 : Crystal Field Theory में t₂g एवं eg ऑर्बिटल्स क्या हैं?
उत्तर: अष्टफलकीय क्षेत्र में d-ऑर्बिटल्स के दो सेट।
प्रश्न 17 : Δ₀ का मान कम होने पर यौगिक का रंग क्या होता है?
उत्तर: उच्च तरंगदैर्ध्य (low energy) अवशोषण → complementary color.
प्रश्न 18 : [Ti(H₂O)₆]³⁺ का रंग क्यों बैंगनी है?
उत्तर: d-d संक्रमण के कारण हरा-पीला अवशोषण।
प्रश्न 19 : मजबूत क्षेत्र लिगेण्ड कौन से हैं?
उत्तर: CN⁻, CO, en आदि।
प्रश्न 20 : कमजोर क्षेत्र लिगेण्ड से उच्च स्पिन यौगिक बनता है?
उत्तर: हाँ (जैसे F⁻, H₂O)।
प्रश्न 21 : IUPAC नामकरण में धातु के बाद क्या लगाते हैं?
उत्तर: ऑक्सीकरण अवस्था रोमन अंक में।
प्रश्न 22 : K₃[Fe(CN)₆] का नाम क्या है?
उत्तर: पोटैशियम हेक्सासायनिडोफेरेट(III)
प्रश्न 23 : लिगेण्ड NH₃ का नाम क्या है?
उत्तर: एमाइन
प्रश्न 24 : Cl⁻ लिगेण्ड का नाम जब ऋणात्मक हो?
उत्तर: क्लोरिडो
प्रश्न 25 : Haemoglobin में केन्द्रीय धातु क्या है?
उत्तर: Fe²⁺
प्रश्न 26 : Chlorophyll में धातु आयन कौन सा है?
उत्तर: Mg²⁺
प्रश्न 27 : Cisplatin का सूत्र क्या है?
उत्तर: cis-[Pt(NH₃)₂Cl₂]
प्रश्न 28 : EDTA का उपयोग क्या है?
उत्तर: जल की कठोरता निवारण एवं धातु विषाक्तता उपचार।
प्रश्न 29 : [Cr(NH₃)₆]³⁺ चुंबकीय गुण क्या है?
उत्तर: पैरामैग्नेटिक (3 unpaired electrons)
प्रश्न 30 : [NiCl₄]²⁻ की ज्यामिति क्या है?
उत्तर: चतुष्फलकीय (tetrahedral)
प्रश्न 31 : संयोजन स्थिति समावयवता का उदाहरण?
उत्तर: [Co(NH₃)₅SO₄]Br एवं [Co(NH₃)₅Br]SO₄
प्रश्न 32 : लिगेण्ड विनिमय समावयवता किसमें?
उत्तर: [Co(NH₃)₅(H₂O)]Cl₃ एवं [Co(NH₃)₅Cl]Cl₂(H₂O)
प्रश्न 33 : Spectrochemical series में CO की स्थिति?
उत्तर: सबसे मजबूत क्षेत्र लिगेण्ड।
प्रश्न 34 : d¹ विन्यास में CFSE क्या है?
उत्तर: -0.4 Δ₀
प्रश्न 35 : [Fe(CN)₆]⁴⁻ निम्न स्पिन है क्योंकि?
उत्तर: CN⁻ मजबूत लिगेण्ड।
प्रश्न 36 : [CoF₆]³⁻ उच्च स्पिन है?
उत्तर: हाँ, F⁻ कमजोर लिगेण्ड।
प्रश्न 37 : MO theory में σ दाता लिगेण्ड क्या करते हैं?
उत्तर: धातु के σ ऑर्बिटल में इलेक्ट्रॉन दान।
प्रश्न 38 : π स्वीकारी लिगेण्ड कौन से?
उत्तर: CO, CN⁻
प्रश्न 39 : उपसहसंयोजक यौगिकों की स्थायित्व स्थिरांक को क्या कहते हैं?
उत्तर: गठन स्थिरांक (β)
प्रश्न 40 : Chelate effect क्या है?
उत्तर: बहुदंतुर लिगेण्ड से जटिल की स्थायित्वता बढ़ना।
प्रश्न 41 : [PtCl₄]²⁻ की ज्यामिति?
उत्तर: वर्ग समतलीय
प्रश्न 42 : trans प्रभाव का क्रम?
उत्तर: CN⁻ > CO > NH₃ > Cl⁻
प्रश्न 43 : [Ma₃b₃] में facial एवं meridional समावयव कितने?
उत्तर: 2
प्रश्न 44 : Vitamin B₁₂ में धातु?
उत्तर: Co
प्रश्न 45 : कार्बोनिल यौगिकों में EAN नियम?
उत्तर: 36 (नोबल गैस विन्यास)
प्रश्न 46 : [Ni(CO)₄] में Ni की ऑक्सीकरण अवस्था?
उत्तर: 0
प्रश्न 47 : Synergic bonding किसमें?
उत्तर: धातु-कार्बोनिल यौगिकों में।
प्रश्न 48 : Wilkinson उत्प्रेरक क्या है?
उत्तर: [RhCl(PPh₃)₃] – हाइड्रोजनीकरण के लिए।
प्रश्न 49 : Zeise’s salt का सूत्र?
उत्तर: K[PtCl₃(η²-C₂H₄)]
प्रश्न 50 : उपसहसंयोजक यौगिकों का जैविक महत्व क्या है?
उत्तर: ऑक्सीजन परिवहन, प्रकाश संश्लेषण, utpreran
दूसरा चरण : 10 लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions
- उपसहसंयोजक यौगिक एवं द्विक नमक में अंतर लिखिए।
उपसहसंयोजक यौगिक में लिगेण्ड जटिल आयन के अंदर सहसंयोजी बंध से जुड़े रहते हैं।
द्विक नमक में सभी आयन अलग-अलग आयनित होते हैं।
उदाहरण: [Co(NH₃)₆]Cl₃ बनाम CoCl₃·6NH₃। - लिगेण्ड के प्रकार लिखिए।
दंतुरता: एकदंतुर (NH₃), द्विदंतुर (en), षट्दंतुर (EDTA)।
आवेश: धनात्मक (NO⁺), ऋणात्मक (Cl⁻), उदासीन (H₂O)। - ज्यामितीय समावयवता क्या है? उदाहरण दें।
लिगेण्डों की सापेक्ष स्थिति में अंतर।
[Pt(NH₃)₂Cl₂]: cis (पीला) एवं trans (हरा)। - संयोजन समावयवता के दो प्रकार लिखिए।
आयनन समावयवता: [Co(NH₃)₅Br]SO₄ एवं [Co(NH₃)₅SO₄]Br।
हाइड्रेट समावयवता: [Cr(H₂O)₆]Cl₃ एवं [Cr(H₂O)₅Cl]Cl₂·H₂O। - Spectrochemical series क्या है?
लिगेण्डों की क्षेत्र विभाजन शक्ति का क्रम।
I⁻ < Br⁻ < Cl⁻ < F⁻ < H₂O < NH₃ < en < CN⁻ < CO। - यौगिकों के रंग का कारण क्या है?
d-d इलेक्ट्रॉन संक्रमण से दृश्य प्रकाश अवशोषण।
पूरक रंग दिखाई देता है। - Chelate effect क्या है?
बहुदंतुर लिगेण्ड से जटिल की स्थायित्वता बढ़ना।
एन्ट्रॉपी वृद्धि के कारण।
8 Cisplatin का उपयोग बताइए।
कैंसर उपचार में।
DNA क्रॉस लिंक बनाता है। - EAN नियम क्या है?
धातु की प्रभावी परमाणु संख्या 36 (नोबल गैस)।
कार्बोनिल यौगिकों में लागू। - trans प्रभाव क्या है?
एक लिगेण्ड विपरीत लिगेण्ड को कमजोर करता है।
CN⁻ सबसे मजबूत।
तीसरा चरण : 10दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions
- erner सिद्धांत की व्याख्या कीजिए तथा [Co(NH₃)₆]Cl₃ के आधार पर समझाइए।
Ans- Werner ने धातु की दो संयोजकताएँ बताईं: प्राथमिक (आयनिक) एवं द्वितीयक (उपसहसंयोजक)।
[Co(NH₃)₆]Cl₃ में Co³⁺ के साथ 6 NH₃ द्वितीयक बंध से जुड़े, उपसहसंयोजक संख्या 6।
आयनन पर [Co(NH₃)₆]³⁺ + 3Cl⁻ बनता है, AgNO₃ से 3 Cl⁻ अवक्षेपित।
इससे 1:3 विद्युत अपघट्य सिद्ध होता है।
द्विक नमक CoCl₃·6NH₃ में सभी Cl⁻ बाहर होते, कोई जटिल आयन नहीं। - प्रकाशिक समावयवता की व्याख्या कीजिए?
Ans- प्रकाशिक समावयव दर्पण प्रतिबिंब होते हैं जो अतिस्थापित नहीं होते।
[Co(en)₃]³⁺ अष्टफलकीय है, तीन en लिगेण्ड चेलेट रिंग बनाते हैं।
रिंग helical व्यवस्था में होती है, जिससे d एवं l रूप बनते हैं।
केवल cis रूप में संभव, trans में प्रकाशिक सक्रियता नहीं।
2 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन → पैरामैग्नेटिक।
मजबूत लिगेण्ड युग्मन बाध्य करता है, कमजोर नहीं। - Crystal Field Theory से d⁴ विन्यास में उच्च एवं निम्न स्पिन यौगिक समझाइए।
Ans- अष्टफलकीय क्षेत्र में d-ऑर्बिटल t₂g (निम्न ऊर्जा) एवं eg (उच्च) में विभाजित।
Δ₀ > P → निम्न स्पिन: t₂g⁴ eg⁰, 0 अयुग्मित, CFSE = -1.6 Δ₀ + 2P।
Δ₀ < P → उच्च स्पिन: t₂g³ eg¹, 4 अयुग्मित, CFSE = -0.6 Δ₀ + P।
मजबूत लिगेण्ड (CN⁻) निम्न स्पिन, कमजोर (F⁻) उच्च स्पिन बनाता है।
उदाहरण: [Mn(CN)₆]³⁻ (निम्न), [MnF₆]³⁻ (उच्च)। - IUPAC नामकरण के नियम लिखिए तथा दो उदाहरण दीजिए।
Ans- लिगेण्ड वर्णक्रमानुसार, उपसर्ग (di, tri), ऋणात्मक लिगेण्ड -o से।
धातु + ऑक्सीकरण अवस्था (रोमन), जटिल ऋणायन में -ate।
उदाहरण 1: [Co(NH₃)₄Cl₂]Cl → टेट्राएमाइनडाइक्लोरिडोकोबाल्ट(III) क्लोराइड।
उदाहरण 2: K₄[Fe(CN)₆] → पोटैशियम हेक्सासायनिडोफेरेट(II)।
धनायन पहले, ऋणायन बाद में लिखा जाता है। - उपसहसंयोजक यौगिकों के अनुप्रयोग लिखिए (कम से कम 4)।
Ans- EDTA का उपयोग जल की कठोरता निवारण एवं धातु विषाक्तता (जैसे लेड) के उपचार में होता है।
Cisplatin (cis-[Pt(NH₃)₂Cl₂]) कैंसर की कीमोथेरेपी में DNA क्रॉस लिंक बनाकर कोशिका विभाजन रोकता है।
[Ag(NH₃)₂]⁺ टॉलेंस अभिकर्मक के रूप में एल्डिहाइड की पहचान करता है।
Wilkinson उत्प्रेरक [RhCl(PPh₃)₃] एल्कीन के हाइड्रोजनीकरण में प्रयुक्त होता है।
Ziegler-Natta उत्प्रेरक (TiCl₄ + AlR₃) पोलीथीन जैसे पोलीमर बनाने में काम आता है। - Haemoglobin एवं Chlorophyll की संरचना एवं कार्य समझाइए।
Ans- Haemoglobin में Fe²⁺ पोर्फिरिन रिंग (हेम) के केंद्र में होता है, 4 N से उपसहसंयोजित।
यह O₂ को फेफड़े से ऊतकों तक ले जाता है, सहसंयोजक बंध से बांधता है।
Chlorophyll में Mg²⁺ पोर्फिरिन रिंग में होता है, प्रकाश संश्लेषण में प्रकाश अवशोषण करता है।
दोनों मैक्रोसाइक्लिक चेलेट यौगिक हैं, धातु आयन कार्य के लिए आवश्यक।
CO बांधने पर Haemoglobin विषैला हो जाता है (कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन)। - MO theory से धातु-कार्बोनिल बंधन समझाइए।
Ans- कार्बोनिल (CO) में C से σ दान धातु के खाली ऑर्बिटल में होता है।
धातु से π बैक डोनेशन CO के खाली π* ऑर्बिटल में जाता है।
यह synergic प्रभाव बंध को मजबूत बनाता है, M–C बंध छोटा, C–O लंबा।
[Ni(CO)₄] में Ni(0) 18 इलेक्ट्रॉन नियम पूरा करता है।
π बैक बॉन्डिंग के बिना CO केवल कमजोर σ दाता होता।
संयोजन स्थिति समावयवता (Linkage Isomerism) समझाइए, उदाहरण सहित। - जब लिगेण्ड दो स्थानों से बंध सकता है, तब संयोजन स्थिति समावयवता होती है।
Ans- NO₂⁻ लिगेण्ड N से (नाइट्रिटो-N) या O से (नाइट्रिटो-O) बंध सकता है।
[Co(NH₃)₅(NO₂)]Cl₂ : पीला (N-बंधित), लाल (O-बंधित)।
SCN⁻ : थायोसायनेटो-S या आइसोथायोसायनेटो-N।
रासायनिक गुण भिन्न होते हैं, जैसे O-बंधित अधिक प्रतिक्रियाशील। - Crystal Field Stabilization Energy (CFSE) की गणना d⁵ विन्यास के लिए उच्च एवं निम्न स्पिन में कीजिए।
Ans- अष्टफलकीय क्षेत्र में t₂g (-0.4 Δ₀), eg (+0.6 Δ₀)।
उच्च स्पिन d⁵: t₂g³ eg² → CFSE = (3×-0.4) + (2×0.6) = -1.2 + 1.2 = 0 Δ₀।
निम्न स्पिन d⁵: t₂g⁵ eg⁰ → CFSE = (5×-0.4) + (0×0.6) + 2P = -2.0 Δ₀ + 2P।
उच्च स्पिन में युग्मन ऊर्जा (P) नहीं लगती, निम्न में 2P लगती है।
[Fe(H₂O)₆]²⁺ उच्च स्पिन (0 Δ₀), [Fe(CN)₆]⁴⁻ निम्न स्पिन (-2.0 Δ₀ + 2P)। - Valence Bond Theory से [Ni(CN)₄]²⁻ एवं [NiCl₄]²⁻ की ज्यामिति एवं चुंबकीय गुण समझाइए।
Ans- [Ni(CN)₄]²⁻ में Ni²⁺ (d⁸), CN⁻ मजबूत लिगेण्ड → dsp² संकरित।
वर्ग समतलीय ज्यामिति, सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित → डायामैग्नेटिक।
[NiCl₄]²⁻ में Cl⁻ कमजोर → sp³ संकरित, चतुष्फलकीय।
चौथा चरण : 30 महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points) –
- उपसहसंयोजक यौगिक: जटिल आयन + प्रतिसंयोजक।
- लिगेण्ड: इलेक्ट्रॉन दाता (mono, bi, polydentate)।
- उपसहसंयोजक संख्या: लिगेण्ड दांत × संख्या (आमतौर पर 4 या 6)।
- Werner सिद्धांत: प्राथमिक एवं द्वितीयक संयोजकता।
- समावयवता प्रकार: ज्यामितीय, प्रकाशिक, संयोजन, आयनन, लिगेण्ड, हाइड्रेट।
- प्रकाशिक: केवल cis रूप में, en जैसे चेलेट में।
- VB theory: संकरिता से ज्यामिति (sp³ tetrahedral, dsp² square planar, sp³d² octahedral)।
- CFT: Δ₀ splitting, उच्च/निम्न स्पिन, CFSE = (-0.4x + 0.6y)Δ₀ + P।
- Spectrochemical series याद रखें (I⁻ से CO तक)।
- रंग: complementary color d-d से।
- चुंबकत्व: unpaired electrons से।
- IUPAC: लिगेण्ड α顺序, उपसर्ग, धातु(ऑक्सी.), ऋणायन।
- K₃[Cr(C₂O₄)₃]: पोटैशियम ट्राइऑक्सलेटोक्रोमेट(III)।
- स्थायित्व: chelate > monodentate, मजबूत लिगेण्ड > कमजोर।
- Macrocyclic effect: crown ether जैसे।
- जैविक: Hb (Fe), Chlorophyll (Mg), Vit B12 (Co), Carboxypeptidase (Zn)।
- चिकित्सा: Cisplatin, EDTA chelation therapy।
- विश्लेषण: [Ni(DMG)₂] लाल अवक्षेप Ni के लिए।
- उत्प्रेरण: Wilkinson, Ziegler-Natta पोलीमराइजेशन।
- Organometallic: Zeise’s salt (η²-alkene), Ferrocene (sandwich)।
- EAN: 18 इलेक्ट्रॉन नियम organometallic में।
- Synergic bonding: M-CO में σ + π।
- trans effect: synthesis में उपयोग (CN⁻ सबसे मजबूत)।
- Limonit test: [Co(H₂O)₆]²⁺ गुलाबी → [CoCl₄]²⁻ नीला।
- d⁰, d¹⁰: रंगहीन, डायामैग्नेटिक।
- Jahn-Teller distortion: d⁹ Cu²⁺ में elongated octahedral।
- Nephelauxetic effect: लिगेण्ड से Δ कमी।
- Tanabe-Sugano diagram: स्पेक्ट्रा विश्लेषण के लिए।
- परीक्षा टिप: समावयव चित्र, CFSE गणना, नामकरण, अनुप्रयोग जरूर तैयार करें।