BSEB Class 12th Physics Chapter 9 ” किरण प्रकाशिकी और प्रकाशिकी तंत्र ” Objectives & Subjectives Revision One Shot

पहला चरण : 50 Objectives With Answers —

  1. किरण प्रकाशिकी में प्रकाश को क्या माना जाता है?
    उत्तर: किरणें
  2. परावर्तन का प्रथम नियम क्या है?
    उत्तर: आपतित किरण, परावर्तित किरण और लंब एक ही समतल में होते हैं
  3. परावर्तन का द्वितीय नियम क्या है?
    उत्तर: आपतन कोण = परावर्तन कोण
  4. समतल दर्पण द्वारा बनी प्रतिबिंब की प्रकृति क्या है?
    उत्तर: आभासी और सीधी
  5. समतल दर्पण में वस्तु और प्रतिबिंब की दूरी दर्पण से कितनी होती है?
    उत्तर: समान
  6. गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या को क्या दर्शाते हैं?
    उत्तर: R
  7. अवतल दर्पण का फोकस कहाँ होता है?
    उत्तर: दर्पण के सामने
  8. उत्तल दर्पण का फोकस कहाँ होता है?
    उत्तर: दर्पण के पीछे
  9. दर्पण सूत्र क्या है?
    उत्तर: 1/v + 1/u = 1/f
  10. फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या में संबंध क्या है?
    उत्तर: f = R/2
  11. अवतल दर्पण में यदि वस्तु फोकस पर हो तो प्रतिबिंब कहाँ बनता है?
    उत्तर: अनंत पर
  12. उत्तल दर्पण द्वारा बनी प्रतिबिंब की प्रकृति क्या होती है?
    उत्तर: आभासी, सीधी और छोटी
  13. अवतल दर्पण में वस्तु अनंत पर हो तो प्रतिबिंब कहाँ बनता है?
    उत्तर: फोकस पर
  14. दर्पण का आवर्धन सूत्र क्या है?
    उत्तर: m = -v/u
  15. अवतल दर्पण में वस्तु वक्रता केंद्र पर हो तो प्रतिबिंब कैसा बनता है?
    उत्तर: वास्तविक, उल्टा और समान आकार का
  16. प्रकाश का अपवर्तन क्या है?
    उत्तर: प्रकाश का माध्यम बदलने पर दिशा परिवर्तन
  17. स्नेल का नियम क्या है?
    उत्तर: n₁ sin i = n₂ sin r
  18. पूर्ण आंतरिक परावर्तन की शर्त क्या है?
    उत्तर: i > क्रांतिक कोण
  19. लेन्स क्या है?
    उत्तर: पारदर्शी माध्यम जिसके दो सतह वक्र होते हैं
  20. उत्तल लेन्स का फोकस कहाँ होता है?
    उत्तर: लेन्स के दूसरी ओर
  21. अवतल लेन्स का फोकस कहाँ होता है?
    उत्तर: लेन्स के सामने
  22. लेन्स सूत्र क्या है?
    उत्तर: 1/f = 1/v – 1/u
  23. उत्तल लेन्स में वस्तु फोकस पर हो तो प्रतिबिंब कहाँ बनता है?
    उत्तर: अनंत पर
  24. अवतल लेन्स द्वारा बनी प्रतिबिंब की प्रकृति क्या होती है?
    उत्तर: आभासी, सीधी और छोटी
  25. लेन्स का आवर्धन सूत्र क्या है?
    उत्तर: m = v/u
  26. प्रकाशीय केंद्र क्या है?
    उत्तर: लेन्स का वह बिंदु जहाँ से गुजरने वाली किरण बिना विचलन के निकलती है
  27. प्रकाश की चाल निर्वात में कितनी होती है?
    उत्तर: 3 × 10⁸ m/s
  28. अपवर्तनांक का सूत्र क्या है?
    उत्तर: n = c/v
  29. क्रांतिक कोण का सूत्र क्या है?
    उत्तर: sin c = 1/n
  30. ऑप्टिकल फाइबर का सिद्धांत क्या है?
    उत्तर: पूर्ण आंतरिक परावर्तन
  31. दूरदर्शी में प्रयुक्त लेन्स कौन से होते हैं?
    उत्तर: उत्तल लेन्स (ऑब्जेक्टिव और आईपीस)
  32. सूक्ष्मदर्शी में ऑब्जेक्टिव लेन्स की फोकस दूरी कैसी होती है?
    उत्तर: छोटी
  33. प्रिज्म क्या है?
    उत्तर: पारदर्शी त्रिकोणीय माध्यम
  34. प्रिज्म में न्यूनतम विचलन कोण का सूत्र क्या है?
    उत्तर: δ_min = (n-1)A
  35. वर्ण विक्षेपण क्या है?
    उत्तर: विभिन्न तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का अलग-अलग अपवर्तन
  36. इंद्रधनुष कैसे बनता है?
    उत्तर: जल की बूंदों में अपवर्तन, परावर्तन और विक्षेपण से
  37. मायोपिया दोष क्या है?
    उत्तर: निकट दृष्टि दोष
  38. मायोपिया सुधार के लिए कौन सा लेन्स प्रयोग होता है?
    उत्तर: अवतल लेन्स
  39. हाइपरमेट्रोपिया क्या है?
    उत्तर: दूर दृष्टि दोष
  40. हाइपरमेट्रोपिया सुधार के लिए कौन सा लेन्स?
    उत्तर: उत्तल लेन्स
  41. प्रेस्बायोपिया क्या है?
    उत्तर: वृद्धावस्था दृष्टि दोष
  42. एस्टीग्मेटिज्म सुधार के लिए कौन सा लेन्स?
    उत्तर: बेलनाकार लेन्स
  43. प्रकाशीय यंत्र में प्रयुक्त दर्पण का उदाहरण क्या है?
    उत्तर: पेरिस्कोप में समतल दर्पण
  44. टॉर्च में कौन सा दर्पण प्रयोग होता है?
    उत्तर: अवतल दर्पण
  45. वाहनों के हेडलाइट में कौन सा दर्पण?
    उत्तर: अवतल दर्पण
  46. दांत के डॉक्टर का दर्पण कौन सा होता है?
    उत्तर: अवतल दर्पण
  47. रियर व्यू मिरर में कौन सा दर्पण?
    उत्तर: उत्तल दर्पण
  48. प्रकाश का तरंग प्रकृति सिद्ध करने वाला प्रयोग कौन सा है?
    उत्तर: यंग का द्विस्लिट प्रयोग
  49. किरण प्रकाशिकी की सीमा क्या है?
    उत्तर: जब वस्तु का आकार तरंगदैर्ध्य से तुलनीय हो
  50. प्रकाशीय तंत्र में मुख्य अक्ष क्या है?
    उत्तर: लेन्स या दर्पण के केंद्र से गुजरने वाली रेखा
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दूसरा चरण : 10 Short Type Question Answers

  1. किरण प्रकाशिकी क्या है?
    Ans- किरण प्रकाशिकी में प्रकाश को सीधी रेखाओं (किरणों) में मानकर अध्ययन किया जाता है।
    यह परावर्तन, अपवर्तन, लेन्स, दर्पण आदि पर आधारित है।
  2. पूर्ण आंतरिक परावर्तन की शर्तें लिखिए।
    Ans- प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाए।
    आपतन कोण > क्रांतिक कोण (i > i_c)।
  3. लेन्स निर्माता सूत्र लिखिए।
    Ans- 1/f = (μ – 1) (1/R₁ – 1/R₂)
    जहां μ = अपवर्तनांक, R₁, R₂ = वक्रता त्रिज्याएँ।
  4. प्रिज्म विचलन कोण का सूत्र लिखिए।
    Ans- δ = (μ – 1)A
    न्यूनतम विचलन के लिए (छोटे A हेतु)।
  5. माइक्रोस्कोप की बढ़ाई क्षमता लिखिए।
    Ans- M = mₑ × m₀ = (L/f₀) × (D/fₑ)
    जहां L = नली लंबाई, D = न्यून दृष्टि दूरी।
  6. दूरदर्शी की कोणीय बढ़ाई लिखिए।
    Ans- M = f₀ / fₑ
    सामान्य समायोजन में (अनंत पर वस्तु)।
  7. क्रांतिक कोण का सूत्र लिखिए।
    Ans- sin i_c = 1/μ
    जहां μ = सघन माध्यम का अपवर्तनांक (विरल के सापेक्ष)।
  8. ऑप्टिकल फाइबर का सिद्धांत क्या है?
    Ans- पूर्ण आंतरिक परावर्तन।
    कोर का μ > क्लैडिंग का μ।
  9. पावर ऑफ लेन्स क्या है?
    Ans- P = 1/f (मीटर में)
    इकाई: डाइऑप्टर (D)।
  10. रंगीन विपथन (Chromatic Aberration) क्या है?
    Ans- लेन्स से विभिन्न रंगों का फोकस एक बिंदु पर न होना।
    μ लाल < μ बैंगनी के कारण।

तीसरा चरण: 10 Long Question Answers

  1. पूर्ण आंतरिक परावर्तन की शर्तें समझाइए तथा मृगतृष्णा एवं ऑप्टिकल फाइबर में इसके अनुप्रयोग लिखिए।
    Ans- पूर्ण आंतरिक परावर्तन तब होता है जब प्रकाश सघन से विरल माध्यम में i > i_c पर जाए।
    क्रांतिक कोण: sin i_c = 1/μ। उदाहरण: पानी-हवा में i_c ≈ 48.7° (μ = 4/3)।
    मृगतृष्णा: गर्म सड़क पर हवा की परतें μ घटाती हैं → प्रकाश ऊपर मुड़ता है → आभास।
    ऑप्टिकल फाइबर: कोर (μ₁) > क्लैडिंग (μ₂) → प्रकाश बार-बार परावर्तित होकर चलता है।
    सूचना संचार, एंडोस्कोपी में उपयोग। न्यूनतम हानि, उच्च बैंडविड्थ।
  2. लेन्स के लिए अपवर्तन सूत्र व्युत्पन्न कीजिए तथा लेन्स निर्माता सूत्र प्राप्त कीजिए।
    Ans- पतले लेन्स के लिए, वक्र सतह से अपवर्तन: μ/v – 1/u = (μ – 1)/R।
    पहली सतह: μ/v₁ – 1/u = (μ – 1)/R₁। दूसरी सतह: 1/v – μ/v₁ = (1 – μ)/R₂।
    जोड़ने पर: 1/v – 1/u = (μ – 1)(1/R₁ – 1/R₂)।
    फोकस दूरी: u → -∞, v = f → 1/f = (μ – 1)(1/R₁ – 1/R₂)।
    साइन कन्वेंशन: प्रकाश बाएँ से दाएँ, वक्रता केंद्र दाएँ हो तो R धनात्मक।
  3. यौगिक माइक्रोस्कोप की संरचना, कार्य सिद्धांत एवं बढ़ाई क्षमता व्युत्पन्न कीजिए।
    Ans- यौगिक माइक्रोस्कोप में अभिदृक लेन्स (f₀ छोटा) एवं नेत्र लेन्स (fₑ) होती है।
    वस्तु अभिदृक फोकस के अंदर (u₀ < f₀) → वास्तविक, उल्टा, बड़ा प्रतिबिंब A’B’।
    A’B’ नेत्र लेन्स के फोकस के अंदर → अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर, बड़ा, उल्टा।
    रैखिक बढ़ाई m₀ = v₀/u₀ ≈ L/f₀, कोणीय mₑ = D/fₑ → कुल M = (L/f₀)(D/fₑ)।
    L = नली लंबाई (v₀ – u₀), D = 25 सेमी। रिज़ॉल्विंग पावर: 0.61λ/(μ sinθ)।
  4. खगोलीय दूरदर्शी की संरचना, कार्य एवं सामान्य समायोजन में लंबाई लिखिए।
    Ans- खगोलीय दूरदर्शी में अभिदृक लेन्स (f₀ बड़ा) एवं नेत्र लेन्स (fₑ छोटा)।
    अनंत पर वस्तु → अभिदृक पर समांतर किरणें → फोकस पर छोटा वास्तविक प्रतिबिंब।
    यह प्रतिबिंब नेत्र लेन्स के फोकस पर → अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर, उल्टा।
    कोणीय बढ़ाई M = f₀ / fₑ। नली लंबाई L = f₀ + fₑ (सामान्य समायोजन)।
    रिज़ॉल्विंग पावर = D/(1.22λ), D = व्यास। तारे के कोणीय पृथक्करण मापने में उपयोग।
  5. प्रकाशीय तंतु (Optical Fiber) की संरचना, कार्य सिद्धांत एवं लाभ लिखिए।
    Ans- ऑप्टिकल फाइबर में कोर (μ₁ ≈ 1.5), क्लैडिंग (μ₂ < μ₁), बफर कोटिंग।
    प्रकाश कोर में प्रवेश कर क्रांतिक कोण से अधिक पर क्लैडिंग से परावर्तित होता है।
    पूर्ण आंतरिक परावर्तन से प्रकाश बिना हानि के दूर तक जाता है।
    स्वीकार कोण: sin θₐ = √(μ₁² – μ₂²)। संख्यात्मक एपर्चर NA = μ sin θₐ।
    लाभ: कम हानि, उच्च गति, विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप मुक्त, पतला, सुरक्षित।
  6. प्रिज्म के माध्यम से न्यूनतम विचलन की व्याख्या कीजिए तथा सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
    Ans- प्रिज्म में प्रकाश दो बार अपवर्तित होता है: प्रवेश एवं निर्गमन।
    विचलन δ = i₁ + i₂ – A, जहाँ A = प्रिज्म कोण।
    न्यूनतम विचलन पर i₁ = i₂ = i, तथा अपवर्तनांक μ = sin[(δₘ + A)/2] / sin(A/2)।
    छोटे A के लिए δₘ ≈ (μ – 1)A।
    प्रयोग: μ मापने के लिए स्पेक्ट्रोमीटर में उपयोग। सफेद प्रकाश → वर्णक्रम।
  7. गोलाकार विपथन (Spherical Aberration) क्या है? इसे कैसे कम किया जाता है?
    Ans- गोलाकार विपथन: लेन्स के किनारी एवं मध्य भाग से किरणें अलग फोकस पर मिलती हैं।
    पराक्ष किरणें अधिक अपवर्तित → फोकस निकट, अक्षीय कम → फोकस दूर।
    कारण: लेन्स की गोलाकार सतह।
    निवारण: (i) परिवर्तनीय एपर्चर (स्टॉप), (ii) प्लैनो-कॉन्वेक्स लेन्स का सही उपयोग,
    (iii) दो लेन्सों का संयोजन (एक्रोमैट), (iv) परवलयिक दर्पण।
  8. मानव नेत्र की संरचना एवं प्रकाशीय दोष (जैसे निकट दृष्टि, दूर दृष्टि) समझाइए।
    Ans- मानव नेत्र में कॉर्निया, जलीय द्रव, क्रिस्टलीय लेन्स, काचाभ द्रव।
    लेन्स की फोकस दूरी सिलियरी पेशी से बदलती है (समायोजन)।
    निकट दृष्टि: नेत्रगोलक लंबा → अनंत का प्रतिबिंब रेटिना के पहले → अवतल लेन्स।
    दूर दृष्टि: नेत्रगोलक छोटा → निकट बिंदु दूर → उत्तल लेन्स।
    जरा दृष्टि: समायोजन क्षमता कम → +1 से +3 D चश्मा।
  9. रंगीन विपथन को समझाइए तथा इसे दूर करने के लिए एक्रोमैटिक डबलेट कैसे बनता है?
    Ans- रंगीन विपथन: लेन्स का फोकस रंग पर निर्भर (μ₍बैंगनी₎ > μ₍लाल₎)।
    f₍लाल₎ > f₍बैंगनी₎ → लाल दूर, बैंगनी निकट फोकस।
    एक्रोमैटिक डबलेट: उत्तल (क्राउन ग्लास, μ कम) + अवतल (फ्लिंट ग्लास, μ अधिक)।
    शर्त: ω₁/f₁ = ω₂/f₂, जहाँ ω = (μ_b – μ_r)/(μ – 1)।
    परिणाम: लाल एवं बैंगनी का फोकस समान, मध्य रंग पर थोड़ा अंतर।
  10. स्नेल के नियम से अपवर्तन सूत्र व्युत्पन्न कीजिए तथा लेन्स में छवि स्थिति का सूत्र लिखिए।
    Ans- स्नेल नियम: μ₁ sin i = μ₂ sin r।
    छोटे कोण के लिए: μ₁ i ≈ μ₂ r।
    लेन्स के लिए, पहली सतह से: μ/v₁ – 1/u = (μ – 1)/R₁।
    दूसरी सतह: 1/v – μ/v₁ = (1 – μ)/R₂।
    जोड़कर: 1/v – 1/u = (μ – 1)(1/R₁ – 1/R₂) = 1/f।
    छवि स्थिति: 1/v = 1/f + 1/u (साइन कन्वेंशन सहित)।
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चौथा चरण: 30 Important Points —

  1. किरण प्रकाशिकी: प्रकाश को सीधी रेखाओं (किरणों) में चलने वाला मानकर अध्ययन।
  2. परावर्तन के नियम: (i) आपतित किरण, परावर्तित किरण और लंब एक ही समतल में, (ii) i = r।
  3. समतल दर्पण: प्रतिबिंब आभासी, सीधा, समान आकार का, दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर।
  4. गोलीय दर्पण: अवतल (अंदर की ओर वक्र), उत्तल (बाहर की ओर वक्र)।
  5. वक्रता त्रिज्या (R): गोले का त्रिज्य जिसका भाग दर्पण है।
  6. फोकस दूरी (f): f = R/2।
  7. दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f (न्यू कार्टेशियन चिह्न परिपाटी)।
  8. चिह्न परिपाटी: दर्पण के सामने की दूरी ऋणात्मक, पीछे की धनात्मक।
  9. अवतल दर्पण: वास्तविक/आभासी प्रतिबिंब बनाता है, वस्तु की स्थिति पर निर्भर।
  10. उत्तल दर्पण: हमेशा आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिंब।
  11. आवर्धन (m): m = -v/u = h’/h।
  12. अपवर्तन: प्रकाश का माध्यम बदलने पर दिशा परिवर्तन।
  13. स्नेल का नियम: n₁ sin i = n₂ sin r।
  14. अपवर्तनांक (n): n = c/v = sin i / sin r।
  15. पूर्ण आंतरिक परावर्तन: जब i > क्रांतिक कोण (c), sin c = 1/n।
  16. लेन्स: दो वक्र सतहों वाला पारदर्शी माध्यम।
  17. उत्तल लेन्स: अभिसारी, f धनात्मक।
  18. अवतल लेन्स: अपसारी, f ऋणात्मक।
  19. लेन्स सूत्र: 1/f = 1/v – 1/u।
  20. प्रकाशीय केंद्र: लेन्स से गुजरने वाली किरण बिना विचलन के।
  21. लेन्स का आवर्धन: m = v/u।
  22. प्रिज्म: त्रिकोणीय पारदर्शी माध्यम, विचलन उत्पन्न करता है।
  23. न्यूनतम विचलन: δ_min = (n-1)A।
  24. वर्ण विक्षेपण: विभिन्न रंगों का अलग-अलग अपवर्तन।
  25. ऑप्टिकल फाइबर: पूर्ण आंतरिक परावर्तन पर कार्य करता है।
  26. दूरदर्शी: उत्तल ऑब्जेक्टिव + उत्तल आईपीस।
  27. सूक्ष्मदर्शी: छोटी f का उत्तल ऑब्जेक्टिव + बड़ी f का उत्तल आईपीस।
  28. दृष्टि दोष: मायोपिया (अवतल लेन्स), हाइपरमेट्रोपिया (उत्तल लेन्स)।
  29. प्रेस्बायोपिया: द्विफोकसी लेन्स से सुधार।
  30. प्रकाशीय यंत्र: टॉर्च (अवतल दर्पण), रियर व्यू (उत्तल दर्पण), पेरिस्कोप (समतल दर्पण
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Author

  • Sachin Yadav

    Sachin Yadav is the author of Chhatra Adda, dedicated to providing students with educational resources, MCQs, subjective questions, and quizzes to support their exam preparation.

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