Introduction
देश में पंचायतीराज व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। अब गाँव की सरकार चलाने वाले नेताओं के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता अनिवार्य कर दी गई है। वॉर्ड पंच बनने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 10वीं पास होना जरूरी होगा, जबकि सरपंच पद के दावेदारों के लिए 12वीं पास होना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नया नियम 2026 से होने वाले पंचायतीराज चुनावों में पूरे देश में एकसमान लागू होगा।
सरकार का कहना है कि यह कदम ग्रामीण विकास, डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शी प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। “आज के दौर में स्मार्ट विलेज, ई-गवर्नेंस और डिजिटल योजनाओं का संचालन करने के लिए पंच-सरपंचों का शिक्षित होना जरूरी है। इससे योजनाओं का तेज गति से क्रियान्वयन होगा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी,” केंद्रीय पंचायतीराज मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया।
युवाओं में जोश, अनुभवी नेताओं पर सवाल
इस फैसले ने ग्रामीण भारत में नई बहस छेड़ दी है। युवा मतदाता और शिक्षित कार्यकर्ता इसे ‘ग्रामीण नेतृत्व में क्रांति’ बता रहे हैं। “पढ़ा-लिखा सरपंच मनरेगा, स्वच्छ भारत और डिजिटल इंडिया को बेहतर तरीके से लागू करेगा,” एक युवा नेता ने कहा।
हालांकि, कई अनुभवी ग्रामीण नेता और बुजुर्ग उम्मीदवार इसे चुनौती मान रहे हैं। उनका सवाल है – क्या शिक्षा ही नेतृत्व की एकमात्र कसौटी होनी चाहिए? “अनपढ़ लेकिन ईमानदार और अनुभवी लोग भी गाँव की सेवा करते आए हैं। क्या यह नियम उन्हें बाहर कर देगा?” एक पूर्व सरपंच ने पूछा।
राजनीतिक दलों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
सत्तारूढ़ गठबंधन ने इस कदम को ‘ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक’ बताया है। वहीं, विपक्ष ने इसे ‘लोकतंत्र पर हमला’ करार देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच अभी सीमित है। “शिक्षा जरूरी है, लेकिन पहले हर गाँव तक स्कूल और डिजिटल शिक्षा पहुंचानी चाहिए,” विपक्षी प्रवक्ता ने कहा।
आगे की राह: शिक्षा और जागरूकता जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियम लंबे समय में ग्रामीण नेतृत्व की गुणवत्ता सुधार सकता है, बशर्ते इसके साथ शिक्षा अभियान भी चलाया जाए। “अब समय है कि गाँवों में वयस्क शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और महिला शिक्षा पर जोर दिया जाए,” एक सामाजिक कार्यकर्ता ने सुझाव दिया।
निष्कर्ष
2026 का पंचायती चुनाव न केवल नेताओं की योग्यता, बल्कि ग्रामीण भारत के भविष्य की दिशा तय करेगा। क्या यह नया नियम ग्राम स्वराज का नया अध्याय लिखेगा? यह तो समय बताएगा।
नोट: सभी राज्यों में यह नियम एकसमान लागू होगा। तैयारी शुरू करने का समय अब है!